आप अभी भी अपनी घिसी पिटी लाइफ जी रहे हैं और सोच रहे हैं कि सक्सेस क्यों नहीं मिल रही। सच तो यह है कि आपकी यह एवरेज पहचान ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन है। अगर आपने अपनी असली पावर को छुपाए रखा तो यकीन मानिए आप पूरी जिंदगी बस दूसरों की तरक्की देखकर जलने में ही बिता देंगे।
क्या आप अपनी डरी हुई और कमजोर पहचान के साथ ही मरना चाहते हैं। टॉड हरमन की यह किताब आपको सिखाएगी कि कैसे एक सीक्रेट पहचान बनाकर आप अपनी दुनिया बदल सकते हैं। आइए जानते हैं वह ३ लेसन जो आपको एक आम इंसान से सुपरह्यूमन बना देंगे।
लेसन १ : द एक्स्ट्राऑर्डिनरी वर्ल्ड और आपकी नई पहचान
क्या आपको भी ऐसा लगता है कि आप किसी फिल्म के साइड एक्टर बनकर रह गए हैं। आप मेहनत तो पूरी कर रहे हैं पर जब असली परफॉरमेंस की बात आती है तो आपके हाथ पैर फूलने लगते हैं। असल में दिक्कत आपकी मेहनत में नहीं बल्कि आपकी उस इमेज में है जो आपने अपने दिमाग में पाल रखी है। टॉड हरमन कहते हैं कि हम सब दो दुनिया में जीते हैं। एक है ऑर्डिनरी वर्ल्ड जहाँ हम अपने डर और पुरानी गलतियों के साथ जीते हैं। दूसरी है एक्स्ट्राऑर्डिनरी वर्ल्ड जहाँ आप वह बन जाते हैं जो आप असल में बनना चाहते हैं।
सोचिए एक सेल्समैन है जो क्लाइंट से बात करने में थर-थर कांपता है। वह खुद को एक फेलियर मानता है। अब अगर वह इसी पहचान के साथ मीटिंग में जाएगा तो उसका रिजेक्शन पक्का है। लेकिन यहाँ काम आता है ऑल्टर ईगो का जादू। जैसे ही वह ऑफिस के अंदर कदम रखता है वह खुद को एक शांत और चालाक शिकारी की तरह देखने लगता है। उसे लगता है कि वह खुद नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा इन्फ्लुएंसर है। जैसे ही उसने अपनी पहचान बदली उसकी बॉडी लैंग्वेज और बात करने का तरीका एकदम बदल गया।
यही फर्क है एक आम इंसान और एक लेजेंड में। हम अक्सर सोचते हैं कि हमें अपनी कमियों को ठीक करना चाहिए। लेकिन टॉड हरमन कहते हैं कि कमियों को ठीक करने में सालों बर्बाद मत करो। इसके बजाय एक ऐसी नई पहचान चुन लो जिसमें वह कमियां हो ही न। यह वैसा ही है जैसे आप अपने कंप्यूटर का पुराना हैंग होने वाला सॉफ्टवेयर हटाकर नया सुपरफास्ट वर्जन डाल दें।
क्या आपको लगता है कि स्टेज पर दहाड़ने वाले एक्टर्स असल जिंदगी में भी उतने ही कॉन्फिडेंट होते हैं। बिल्कुल नहीं। उनमें से कई लोग असल में बहुत शर्मीले होते हैं। लेकिन जैसे ही वे स्टेज पर जाते हैं वे अपनी एक अलग पर्सनालिटी पहन लेते हैं। वे उस वक्त खुद को एक शेर की तरह देखते हैं जो शिकार पर निकला है। जब आप अपनी पहचान बदल देते हैं तो आपका दिमाग आपको वैसे ही रिजल्ट्स देना शुरू कर देता है।
अगर आप एक जिम में वर्कआउट कर रहे हैं और आपको लगता है कि अब और वजन नहीं उठेगा तो आप हार मान लेंगे। लेकिन अगर उस पल आप खुद को एक बाहुबली की तरह इमेजिन करें जिसके लिए यह वजन कुछ भी नहीं है तो आपकी मसल्स में अचानक जान आ जाएगी। यह कोई जादू नहीं है बल्कि आपके दिमाग को बेवकूफ बनाने का एक स्मार्ट तरीका है।
ज्यादातर लोग अपनी पुरानी पहचान से इतने चिपके रहते हैं जैसे वह कोई पुश्तैनी जायदाद हो। वे कहते हैं कि भाई मैं तो ऐसा ही हूँ। यही आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी है। आप वह नहीं हैं जो आप कल थे। आप वह बन सकते हैं जो आज आप चुनते हैं। जब आप अपनी एक्स्ट्राऑर्डिनरी वर्ल्ड में कदम रखते हैं तो आप अपनी लिमिट्स को कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं।
लेसन २ : द एनिमी को पहचानो और उसे हराओ
पिछले लेसन में हमने समझा कि एक नई पहचान बनाना क्यों जरूरी है। लेकिन जैसे ही आप कुछ बड़ा करने की सोचते हैं आपके दिमाग के किसी कोने से एक आवाज आती है। वह आवाज कहती है कि भाई तुझसे नहीं हो पाएगा। तू तो वही है जो कल एग्जाम में फेल हुआ था। यह आवाज किसी और की नहीं बल्कि आपके अंदर के एनिमी की है। टॉड हरमन इसे द एनिमी कहते हैं। यह वह विलेन है जो आपकी सक्सेस की फिल्म को फ्लॉप करने की पूरी कोशिश करता है।
मजे की बात यह है कि हम इस विलेन को अपना दोस्त मान बैठते हैं। हमें लगता है कि यह डर हमारी सेफ्टी के लिए है। लेकिन सच तो यह है कि यह डर आपको एक पिंजरे में कैद रख रहा है। सोचिए आप एक डेट पर गए हैं और वहां आपको कुछ इम्प्रेसिव बोलना है। तभी आपका एनिमी कान में आकर बोलता है कि अगर तूने कुछ गलत बोला तो वह हंसेगी। बस आप वहीं ढेर हो जाते हैं। आप हकलाने लगते हैं और पूरा माहौल खराब हो जाता है।
इस एनिमी से लड़ने का सबसे बेस्ट तरीका क्या है। उसे एक नाम दे दो। हां आपने सही सुना। अपने डर और अपनी झिझक को एक नाम दे दो। मान लीजिए आपने अपने डर का नाम रखा खटमल। अब जब भी आपको स्टेज पर जाने से डर लगे तो खुद से कहिए कि यह खटमल फिर से शोर मचा रहा है। जब आप अपने डर को खुद से अलग कर देते हैं तो उसकी ताकत आधी हो जाती है। आप उसे एक कीड़े की तरह देखने लगते हैं जिसे कुचलना बहुत आसान है।
ज्यादातर लोग अपने डर को अपनी पहचान मान लेते हैं। वे कहते हैं कि मुझे बहुत डर लगता है। इसके बजाय कहना शुरू करिए कि मेरे अंदर का खटमल डर रहा है। मैं तो एक ऑल्टर ईगो हूँ जो आग उगलने के लिए तैयार है। यह एक दिमागी खेल है जिसे खेलने में बहुत मजा आता है। जब आप अपने नेगेटिव थॉट्स को एक विलेन की तरह देखते हैं तो आप खुद को एक हीरो की तरह महसूस करने लगते हैं।
भारतीय घरों में अक्सर हमें सिखाया जाता है कि ज्यादा उड़ो मत वरना गिर जाओगे। यह बातें हमारे दिमाग में एक बहुत बड़ा एनिमी बना देती हैं। यह एनिमी हमें रिस्क लेने से रोकता है। लेकिन याद रखिए बिना रिस्क के तो चाय भी अच्छी नहीं बनती। आपका ऑल्टर ईगो इस एनिमी का काल है। जब आप अपनी नई पहचान में होते हैं तो यह एनिमी आपके सामने आने की हिम्मत भी नहीं करता।
जैसे एक फिल्म में हीरो तभी चमकता है जब विलेन तगड़ा हो। वैसे ही आपकी लाइफ की कहानी तभी मजेदार होगी जब आप अपने इस अंदरूनी दुश्मन को धूल चटाएंगे। उसे पहचानिए उसे नाम दीजिए और फिर अपने ऑल्टर ईगो की तलवार से उसका काम तमाम कर दीजिए।
लेसन ३ : द टोटेम और स्विच को ऑन करना
आपने अपनी नई पहचान चुन ली और अपने अंदर के दुश्मन को भी पहचान लिया। लेकिन लाइफ कोई फिल्म नहीं है जहाँ बैकग्राउंड म्यूजिक बजते ही आप अचानक बदल जाएंगे। असली दुनिया में आपको एक स्विच की जरूरत होती है। टॉड हरमन इसे द टोटेम कहते हैं। यह एक ऐसी फिजिकल चीज है जिसे छूते ही या पहनते ही आप अपने ऑल्टर ईगो में बदल जाते हैं। यह वैसा ही है जैसे गंगाधर का चश्मा उतारते ही वह शक्तिमान बन जाता था।
सोचिए आप एक बहुत बड़े एथलीट हैं पर मैदान में उतरते ही नर्वस हो जाते हैं। अब आप एक खास तरह का रिस्ट बैंड पहनते हैं। आप खुद को यह यकीन दिलाते हैं कि जब तक यह बैंड मेरी कलाई पर है मैं एक चीता हूँ जो कभी नहीं थकता। जैसे ही आप उस बैंड को छूते हैं आपका दिमाग तुरंत सिग्नल भेजता है कि भाई अब साधारण इंसान की छुट्टी और सुपरस्टार की एंट्री हो चुकी है। यह छोटा सा टोटेम आपके दिमाग के लिए एक ट्रिगर की तरह काम करता है।
हमारे आसपास ऐसी कई चीजें हो सकती हैं। किसी के लिए यह उसकी चश्मा हो सकता है किसी के लिए उसकी घड़ी या फिर कोई खास अंगूठी। आपने देखा होगा कि कई लोग जब सूट पहनते हैं तो उनकी चाल ढाल बदल जाती है। वे अचानक ज्यादा मैच्योर और कॉन्फिडेंट लगने लगते हैं। वह सूट ही उनका टोटेम है। वह उन्हें याद दिलाता है कि तुम अब घर पर लेटे हुए आलसी इंसान नहीं हो बल्कि एक बिजनेस टायकून हो।
अगर आप एक राइटर हैं और आपको लिखने में आलस आता है तो एक खास टोपी रख लीजिए। खुद से वादा कीजिए कि जब यह टोपी मेरे सिर पर होगी तो मैं सिर्फ और सिर्फ एक जीनियस राइटर हूँ। उस वक्त न मुझे भूख लगेगी न मुझे सोशल मीडिया की याद आएगी। जैसे ही आप टोपी उतारें आप वापस अपने पुराने अवतार में आ सकते हैं। यह सुनने में बचकाना लग सकता है पर दुनिया के बड़े-बड़े परफॉर्मर्स इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।
लोग अक्सर गलती यह करते हैं कि वे सोचते हैं कि मोटिवेशन अंदर से आएगा। भाई मोटिवेशन कोई नल का पानी नहीं है जो जब चाहे खोल लिया। मोटिवेशन के लिए माहौल बनाना पड़ता है और टोटेम वही माहौल बनाता है। जब आप अपनी उस खास चीज को देखते हैं तो आपका पुराना डरपोक वर्जन अपने आप पीछे हट जाता है। आपको अपनी नई पहचान को जीने के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं है बस अपने टोटेम को एक्टिवेट करने की जरूरत है।
तो देर किस बात की है। आज ही अपना एक टोटेम ढूंढिए। वह कुछ भी हो सकता है। उसे एक पावर दीजिए और देखिए कैसे आपकी लाइफ की स्क्रिप्ट रातों रात बदल जाती है। अपनी साधारण पहचान को अलमारी में बंद कीजिए और उस पहचान को बाहर निकालिए जो दुनिया जीतने के लिए पैदा हुई है। याद रखिए अगर आप खुद को नहीं बदलेंगे तो दुनिया आपको अपनी उंगलियों पर नचाती रहेगी। अब चुनाव आपका है।
ऑल्टर ईगो कोई झूठ नहीं है बल्कि यह आपकी छुपी हुई सच्चाई है। आप वह सब कुछ कर सकते हैं जो आपने आज तक सिर्फ सपनों में देखा है। बस अपनी उस पुरानी चमड़ी को उतार फेंकिए जो आपको रोक रही है। आज ही कमेंट्स में बताइए कि आपका ऑल्टर ईगो कौन है और आपका टोटेम क्या होगा। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अपनी काबिलियत पर शक करता है। उठिए और अपनी नई पहचान के साथ दुनिया पर छा जाइए।
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