Blitzscaling (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आप बहुत संभलकर और धीरे धीरे बिजनेस चलाकर अमीर बन जाएंगे तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। दुनिया आपके छोटे से आईडिया को चुराकर आपसे आगे निकल जाएगी और आप बस परफेक्शन के चक्कर में हाथ मलते रह जाएंगे।

इस आर्टिकल में हम ब्लिट्जस्केल‍िंग के वो राज खोलेंगे जो साधारण स्टार्टअप को एक विशाल साम्राज्य में बदल देते हैं। चलिए जानते हैं वो 3 कीमती लेसन जो आपकी ग्रोथ की रफ्तार को कई गुना बढ़ा देंगे।


लेसन १ : प्रायर‍िटी स्पीड ओवर एफ‍िश‍िएंसी

आज के जमाने में अगर आप कछुए की चाल चलकर रेस जीतने का सपना देख रहे हैं तो बॉस आप बहुत गलत रास्ते पर हैं। ब्लिट्जस्केल‍िंग का सबसे पहला और कड़वा सच यही है कि अगर आपको मार्केट में राज करना है तो आपको स्पीड को अपनी पहली पसंद बनाना होगा। अक्सर लोग सोचते हैं कि जब सब कुछ परफेक्ट हो जाएगा तब हम अगला कदम बढ़ाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि परफेक्शन के चक्कर में बैठे रहने वाले लोग बस देखते रह जाते हैं और कोई दूसरा बाजी मार ले जाता है।

मान लीजिए आपने मोहल्ले में एक नई चाट की दुकान खोली। अब आप सोच रहे हैं कि जब तक चांदी की चम्मचें और मखमली कुर्सियां नहीं आ जातीं तब तक मैं दुकान नहीं खोलूंगा। इधर आपके पड़ोस वाले भाई साहब ने एक हाथ ठेला लगाया और ताबड़तोड़ समोसे बेचना शुरू कर दिया। जब तक आपकी चांदी की चम्मचें आएंगी तब तक पूरा मोहल्ला उनके समोसों का दीवाना हो चुका होगा। यही है ब्लिट्जस्केल‍िंग का फंडा। आपको अपनी एफ‍िश‍िएंसी यानी काम को एकदम सटीक तरीके से करने की जिद छोड़नी होगी।

जब आप बहुत तेजी से ग्रो करते हैं तो चीजें बिखरेंगी। काम करने का तरीका थोड़ा खराब भी हो सकता है। शायद आपका कस्टमर सपोर्ट थोड़ा धीमा हो जाए या वेबसाइट में छोटे मोटे बग्स आ जाएं। लेकिन अगर आप इन छोटी कमियों को ठीक करने के लिए अपनी रफ्तार कम कर देंगे तो आप उस बड़े मौके को खो देंगे जो आपके सामने खड़ा है। मार्केट में जो सबसे पहले कब्जा करता है जीत उसी की होती है।

सोचिए अगर फेसबुक या व्हाट्सएप शुरू में ही सब कुछ परफेक्ट बनाने बैठते तो क्या वे आज हर फोन में होते। उन्होंने पहले अपना प्रोडक्ट लोगों तक पहुंचाया और फिर रास्ते में आने वाली गलतियों को सुधारा। लोग अक्सर कहते हैं कि सावधानी हटी दुर्घटना घटी लेकिन स्टार्टअप की दुनिया में रफ्तार घटी तो समझो हस्ती मिटी। आपको एक ऐसी कार चलानी है जिसके टायर आप तेज रफ्तार में ही बदल रहे हैं। यह सुनने में थोड़ा डरावना लग सकता है लेकिन बड़े खिलाड़ियों का खेल ऐसा ही होता है।

अगर आप हर चीज को नाप तौलकर करेंगे तो आप सिर्फ एक अच्छी छोटी कंपनी बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आपको एक बड़ा साम्राज्य खड़ा करना है तो आपको थोड़ी बहुत बर्बादी और अव्यवस्था को गले लगाना ही होगा। स्पीड ही वो चाबी है जो सफलता के बंद दरवाजे खोलती है। जो लोग रिस्क लेने से डरते हैं वे कभी ब्लिट्जस्केल‍िंग नहीं कर सकते। इसलिए परफेक्शन का भूत उतारिए और अपनी रफ्तार बढ़ाइए। क्योंकि इस दौड़ में सिर्फ वही याद रखा जाता है जो सबसे तेज फिनिश लाइन तक पहुंचता है।


लेसन २ : एम‍्ब्रेस केयॉस एंड अनसर्टेंटी

बिजनेस की दुनिया में हम सबको सिखाया जाता है कि हर चीज प्लानिंग के साथ होनी चाहिए। लेकिन ब्लिट्जस्केल‍िंग कहती है कि अगर आपके चारों तरफ सब कुछ एकदम शांत और सलीके से चल रहा है तो समझ लीजिए कि आप काफी धीमे हैं। जब आप बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ते हैं तो आपके आसपास अफरा तफरी मचना तय है। इसे हम केयॉस कहते हैं। और सच तो यह है कि अगर आप इस केयॉस यानी अव्यवस्था से डर गए तो आप कभी बड़े खिलाड़ी नहीं बन पाएंगे।

कल्पना कीजिए कि आपके घर में अचानक से 500 मेहमान आ जाएं और आपने तैयारी सिर्फ 10 लोगों की की थी। अब वहां अफरा तफरी मचेगी। कोई पानी मांग रहा होगा तो कोई खाने के लिए चिल्ला रहा होगा। एक आम इंसान घबराकर दरवाजा बंद कर लेगा। लेकिन एक ब्लिट्जस्केलर उस भीड़ को देखेगा और सोचेगा कि वाह आज तो 500 लोगों को अपना मुरीद बनाने का मौका है। वह फौरन पड़ोस के हलवाई को पकड़ेगा और चाहे जैसे भी हो मेहमानों को संभालेगा। भले ही खाना थोड़ा देरी से मिले या प्लेट्स कम पड़ जाएं लेकिन वह किसी को खाली हाथ नहीं जाने देगा।

यही हाल स्टार्टअप का होता है। जब आपके पास अचानक से लाखों यूजर्स आ जाते हैं तो आपका सर्वर डाउन होगा और आपका ऑफिस एक कबाड़खाना जैसा लगने लगेगा। लोग आपको गालियां भी देंगे। लेकिन आपको उस अनसर्टेंटी यानी अनिश्चितता में मुस्कुराना सीखना होगा। आपको आग बुझाने का काम रोज करना पड़ेगा और मजे की बात यह है कि हर दिन एक नई जगह आग लगी होगी। अगर आप यह सोचकर बैठेंगे कि जब शांति होगी तब मैं काम करूंगा तो यकीन मानिए वो शांति आपकी कंपनी की अंतिम विदाई वाली शांति भी हो सकती है।

ज्यादातर लोग अनसर्टेंटी से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे फेल हो जाएंगे। लेकिन ब्लिट्जस्केल‍िंग में फेल होना कोई बड़ी बात नहीं है बल्कि फेल होकर वहीं रुक जाना असली हार है। आपको अंधेरी सुरंग में दौड़ना है जहां आपको यह नहीं पता कि अगला मोड़ किधर है। लेकिन आप रुक नहीं सकते क्योंकि पीछे से एक बहुत बड़ा पत्थर आपकी तरफ लुढ़कता हुआ आ रहा है और वो पत्थर है आपके कॉम्पिटिटर की ग्रोथ।

अगर आप हर समस्या को जड़ से खत्म करने बैठेंगे तो आप कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आपको यह तय करना होगा कि कौन सी आग को बुझाना जरूरी है और कौन सी आग को थोड़ी देर और जलने दिया जा सकता है। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन सफलता के लिए आपको अपनी शांति का बलिदान देना ही होगा। जो इस केयॉस के बीच अपना संतुलन बनाए रखता है वही अंत में मार्केट का राजा बनता है। अव्यवस्था ही आपकी असली प्रोग्रेस की निशानी है।


लेसन ३ : इवॉल्व योर मैनेजमेंट स्टाइल

जैसे जैसे आपकी कंपनी एक छोटे से गैरेज से निकलकर एक बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस तक पहुंचती है वैसे वैसे आपको अपना चोला भी बदलना पड़ता है। ब्लिट्जस्केल‍िंग का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि आप उस तरीके से कंपनी नहीं चला सकते जिससे आपने शुरुआत की थी। जो चाबियां छोटे ताले खोलती हैं वो तिजोरी का दरवाजा नहीं खोल सकतीं। शुरुआत में आप शायद हर छोटे बड़े फैसले खुद लेते होंगे लेकिन जैसे जैसे आपकी टीम बढ़ती है आपको अपना मैनेजमेंट स्टाइल पूरी तरह बदलना होगा।

इसे ऐसे समझिए कि पहले आप एक छोटी सी गली की क्रिकेट टीम के कैप्टन थे। आप खुद ही बैटिंग करते थे खुद ही बॉलिंग और फील्डिंग भी आप ही सेट करते थे। लेकिन अब आप एक इंटरनेशनल टीम के कोच बन चुके हैं। अगर आप अब भी ग्राउंड पर जाकर हर खिलाड़ी को यह बताएंगे कि बल्ला कैसे पकड़ना है या गेंद कैसे फेंकनी है तो आपकी टीम कभी मैच नहीं जीत पाएगी। अब आपका काम खुद खेलना नहीं है बल्कि यह देखना है कि सही खिलाड़ी सही जगह पर खेल रहा है या नहीं।

जब कंपनी बड़ी होती है तो आपको डेल‍िगेशन सीखना पड़ता है। इसका मतलब है अपना काम दूसरों को सौंपना और उन पर भरोसा करना। कई फाउंडर्स को यह बीमारी होती है कि उन्हें लगता है कि उनके बिना पत्ता भी नहीं हिलना चाहिए। लेकिन ब्लिट्जस्केल‍िंग में अगर आप हर फाइल पर साइन करने बैठेंगे तो आपकी रफ्तार वहीं खत्म हो जाएगी। आपको ऐसे लोग ढूंढने होंगे जो आपसे भी ज्यादा स्मार्ट हों और फिर उन्हें अपना काम करने की आजादी देनी होगी।

मैनेजमेंट स्टाइल बदलने का मतलब यह भी है कि अब आपको कल्चर पर ध्यान देना होगा। जब आपकी टीम में पांच लोग होते हैं तो आप साथ बैठकर समोसे खाते हुए विजन शेयर कर लेते हैं। लेकिन जब पांच सौ लोग हो जाते हैं तो आपको नियम और एक मजबूत वर्क कल्चर बनाना पड़ता है। आपको एक डिक्टेटर से हटकर एक इंस्पिरेशनल लीडर बनना पड़ता है। अगर आप खुद को नहीं बदलेंगे तो आप अपनी ही कंपनी की ग्रोथ के लिए सबसे बड़ी रुकावट बन जाएंगे।

अक्सर लोग अपनी पुरानी आदतों से चिपके रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसी वजह से उन्हें कामयाबी मिली है। लेकिन ब्लिट्जस्केल‍िंग में जो कल काम आया था वो शायद आज बेकार हो जाए। आपको हर स्टेज पर अपनी लीडरशिप को र‍िसेट करना होगा। कभी आपको एक सोल्जर की तरह लड़ना होगा तो कभी एक जनरल की तरह दूर से नजर रखनी होगी। याद रखिए कि कंपनी बड़ी होने का मतलब सिर्फ मुनाफा बढ़ना नहीं है बल्कि आपके सोचने के तरीके का बड़ा होना भी है। अगर आप खुद नहीं बढ़ेंगे तो आपकी कंपनी भी एक जगह आकर ठहर जाएगी।


ब्लिट्जस्केल‍िंग कोई जादू नहीं है बल्कि यह एक रिस्की और तेज तर्रार सफर है जहां आपको हर कदम पर अपनी हिम्मत दिखानी होती है। अगर आप दुनिया बदलना चाहते हैं तो आपको पुरानी धीमी चाल छोड़कर रफ्तार का साथ पकड़ना ही होगा। तो क्या आप तैयार हैं अपने सपनों को बिजली की गति देने के लिए। आज ही अपने बिजनेस या लाइफ में उस एक चीज को पहचानिए जिसे आप स्पीड की वजह से रोक रहे हैं और उसे आजाद कर दीजिए। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो परफेक्शन के जाल में फंसे हुए हैं और कमेंट में बताइए कि क्या आप इस केयॉस को झेलने के लिए तैयार हैं।

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